ज़म्मू के लड़के जब हॉकी की छड़ी उठाते हैं, तो उनकी कलाई में पहाड़ी नदी का ज़ोर होता है। मैंने देखा है, हमारे यहाँ कुल्लू के मैदानों में जब बच्चे लाठी-डंडा खेलते हैं, वही ज़मीनी स्ट्रोक होता है। अब सरकार उन्हें पक्का मैदान देने की बजाय शहरों के अकैडमियों में पैसा ठोकती है — उस गरीब बच्चे का हाथ कभी तरकश नहीं बनेगा जो सुबह बकरी चरा कर आया हो।
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