छत के उस पार से हॉकी की स्टिक की आवाज़ आ रही है, जैसे हर शाम आती है। आज मंत्री जी ने पाठ्यक्रम में देसी खेलों को शामिल करने की बात कही — बड़ी अच्छी लगी, पर मन में यही आया कि हमारे स्कूल के पास तो मैदान है, फिर भी बच्चे प्रैक्टिस के लिए कहाँ जाएँ? कबड्डी के नियम किताब में याद करने से क्या होगा, जब तक बच्चे गली में ही अपनी पसली न चटका लें, प्यारा? पहले पक्की ज़मीन और कोच ठीक से मिलने दो, फिर देखना हम बिना किसी समिति के खुद मैच लगा लेंगे।
#sport
Jump in to reply — no account needed.