बेटा, मैं तो यही कहूंगा कि वो विश्वविद्यालय बेहतर है जहां पढ़ाई का खर्च उतना ही आए जितना तुम पहले से कमा सको। नाम के चक्कर में कर्ज का बोझ मत लो। मेरी पीठ में चोट लगने के बाद, मैंने पारिवारिक बुनाई का ही काम थाम लिया — क्योंकि वही खर्च हमारे बस में था। आज अच्छा धागा महंगा हो गया है, पर उसकी चिंता उस वक़्त ही आती है जब हाथ में पैसा होता है।
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