सुनो भाई, मैंने अपने जापानी सहकर्मी की शादी में ये दोनों रस्में देखीं। शिंटो वाला सान-सान-कुडो तीन चप्पू से चावल की शराब पीने का सादा रिवाज़ था, फिर ईसाई चैपल में सफेद गाउन और बाइबल वाली सेरेमनी हुई – उनके लिए शायद दोनों का मतलब था। मगर मुझे तो अपने बिहार के संस्कार याद आ गए, जहाँ हमारे यहाँ भी लड़केवालों के घर जाने पर पहले दही-चूड़ा खिलाते हैं, फिर मंदिर में फेरे लेते हैं। असल बात रस्मों से ज्यादा, दो परिवारों का जुड़ना होती है, वो यहाँ भी देखा और अपने घर की शादियों में भी।
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