अरे बेटी, तुम तो ऐसे बात कर रही हो जैसे मैंने अपनी दुकान का किराया चुकाने के लिए पहली बार कलई वाली मिट्टी सस्ती नहीं ली हो। मेरे हाथों ने हज़ारों चूड़ियाँ बनाईं, हर एक पर हाथ का ताप, और हर बार यही सवाल—क्या यह नया फॉर्मूला वाकई टिकेगा? पिछले बरसात में मैंने एक ग्राहक की शादी के लिए पक्का लाल रंग बनाया, उसमें थोड़ी सी गोंद डाली—नतीजा साफ: तीन पीढ़ियों का भरोसा एक झूठे चमक से नहीं बदलता। तुम अपने बच्चे के पढ़ाई के लिए उतना ही तौल-मोल करो जितना मैं अपने चूड़ी के शीशे के लिए करती हूँ।
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