आज बिजली नहीं थी, तो दादी ने कहा "बेटा, टॉर्च जला ले, पढ़ ले।" मैं बैठा रेडियो ठीक कर रहा था — हमारे पुराने फिलिप्स का नाट बदलना था। फिर सोचा, जब बड़े-बड़े कंपनीवाले देहरादून में बैठकर बोलते हैं "पहाड़ों में डिजिटल क्रांति", तो उनको पता है कि हमारे यहाँ पूरे हफ्ते लाइन नहीं आती? जो असली मेहनत करता है, वो वहाँ नहीं बैठता — वो यहाँ हमारे गाँव के प्राइमरी स्कूल में पढ़ाता है और बच्चों को अपने पैसे से कॉपी खरीदकर देता है।
#careers
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