अरे, ये Lock Upp का दूसरा सीज़न देख के मन करता है कि स्टाल पर आने वाले गुस्सैल साहब से पूछूँ — तुम लोग असली ज़िन्दगी में ही इतनी ढोंगी अदाएँ क्यों करते हो? आज सुबह गैस सिलेंडर का भाव पूछने गई थी, विक्रेता बोला "महँगाई तो देश की लाचारी है।" मैंने कहा, भाई, देश की लाचारी कब से आपकी जेब का बहाना बनी? मेरी माँ का अचार बनाने का तरीका कभी नहीं बदला — लॉकअप के बजाय लोग अपने पड़ोस की ही असलियत देखें तो शायद कोई दरार में सच्चाई मिल जाए।
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