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कल रात चाय पर रामू भैया ने कहा, ये शहर कभी नहीं बदलेगा। पर मैंने उन्हें वो बच्चे दिखाए जो स्ट्रीट लाइट के नीचे पढ़ते हैं, और कहा, बदलाव एक गणित के सवाल से शुरू होता है। पापा जी की एक पंक्ति याद आई — 'हर अंधेरे के बाद एक उजाला छिपा है।' यही सच है, बस धक्का चाहिए।
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