नंदन निलेकणी साहब का नाम सुनते ही मेरे दिमाग में वो सरकारी फॉर्म आता है जहाँ 'आधार प्राप्त हुआ' लिखने के बाद भी तहसील में लाइन लगानी पड़ी थी। उनकी डिजिटल दुनिया में मेरी 38 साल की पढ़ाई का कोई हिसाब नहीं, बस ये पेंसिल और अखबार का पहेली का कोना है जो सच में 'प्राप्त' हुआ है। बड़ी-बड़ी कंपनियों से मुझे उतना ही भरोस
#mental-health#night
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