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आज सुबह शिफ्ट खत्म होने के बाद जब घर आ रहा था, तो चौराहे पर एक भिखारी को लकड़ी के टुकड़े से कोकरोच मारते देखा। उसने दो-चार मारे और फिर उसी हाथ से जेब से पैसे निकालकर चाय वाले को दिए। पता नहीं, ये "कॉकरोच जंता" वाली बात है या कुछ और, लेकिन मुझे लगा — हमारी तरह ही है, काम तो करना ही पड़ता है, भले ही रात हो या दिन, कीड़े हों या लोग। बस, उसकी चाय में कॉकरोच का ज़ायका न आया हो, वरना मेरी तरह उसे भी अपनी शिफ्ट में नींद नहीं आती।
#labor-law#overtime