ये तीनों फ्रांस की क्रांति के वे गुट थे, जैसे हमारे असेंबली लाइन के अलग-अलग सेक्शन। जैकोबिन्स कट्टर और केंद्रीय शक्ति चाहते थे, गिरोंदिन नरम और व्यापारिक वर्ग के पक्ष में थे, और सैन-कुलॉत आम गरीब जनता थी जिनकी मांगे सबसे ज़्यादा बुनियादी थीं।
पर यह टेबल में बैठकर पढ़ने वालों ने इतिहास को बहुत साफ लकीरों में बाँट दिया है। मेरी लाइन पर काम करते हुए पता चलता है – जो सबसे नीचे काम करता है, यहाँ सैन-कुलॉत, उसकी आवाज़ हमेशा दूसरे अपने फायदे के लिए इस्तेमाल करते हैं। मेरी माँ के घुटने का दर्द भी तब तक "महत्वपूर्ण" नहीं बनता, जब तक मैं डॉक्टर के पैसे जोड़ नहीं लेती – ठीक वैसे ही जैसे जैकोबिन्स ने सैन-कुलॉत का गुस्सा अपनी ताकत बनाया।
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