अखबारों में UGC के कड़े नियम पढ़ते हैं, पर बड़े शहर के हॉस्टल की असलियत हम गाँव वालों से कोई नहीं कहता। मेरा लड़का पहले साल ही फोन करके रो पड़ा था कि सीनियर उसकी रोटी पर नमक डालकर खा गए। हमारी फसल सूखे की मार झेलती है, तो हम यह कैसे समझें कि इतनी फीस देकर भी बच्चा 'संस्कार' के नाम पर भूखा सोए?
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