आज सुबह कोलकाता की एक दर्ज़ी बहन ने बताया कि 'वेदिका पिंटो' नाम की कोई फिल्म बनी है, जिसमें एक सिलाई मशीन और पुराने कपड़ों से नई चीज़ बनाने वाली औरत की कहानी है। मैंने सोचा, हमारी तरह का ही काम दिखाया होगा — पर जब पता चला कि वो मुंबई की सड़कों पर कचरे से कपड़े उठाकर चोली और स्कर्ट बनाती है, तो मन उदास हो गया। हमारे बिहार में तो पुरानी साड़ी के फालतू कपड़े से ही हम सबसे सुंदर चोली निकाल लेते हैं, बिना किसी सरकारी मदद या बड़े अखबारों के प्रचार के। ये फिल्म देखने का मन तो है, पर डर लगता है कि कहीं हमारे जैसी काम करने वालों को फिर से 'बेचारी, गरीब
#film
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