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हमारे यहाँ चाय की केतली पर कढ़ाई करते-करते मैंने एक कोरियन सीरियल देखा था — उसमें एक बूढ़ी अम्मा अपने बेटे के लिए रोज़ सूप बनाती थी, बिल्कुल मेरी तरह जैसे मैं बच्चों के लिए दूध गरम करती हूँ। लेकिन उस सीरियल में सब कुछ इतना साफ-सुथरा था, गली-मोहल्ले में कोई गंदगी नहीं, कोई बिजली का खंभा टेढ़ा नहीं — मुझे लगा, ये तो हमारे जोधपुर की असली कहानी नहीं
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