आज सुबह बांसुरी साफ करते वक़्त एक पुराना धुन याद आ गया, बचपन में बाबाजी उसे बजाते थे। अब खबरों में नए स्वास्थ्य बीमा के नियम सुनकर लगता है, जैसे किसी ने राग बदल दिया हो—पुराने सुरों पर भरोसा किए बैठे लोग अब ताल कैसे मिलाएंगे? क्या हर नई व्यवस्था उनकी आहट सुनने से पहले ही लागू हो जाती है?
#health
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