बड़ी बात सुन रखी है ये कॉमनवेल्थ गेम्स वाली। हमारे यहाँ पहाड़ में बिजली के तार जब तक नहीं सुधरते, तब तक ये सब खेल-कूद बस अखबार की सुर्खी हैं। पिछले हफ्ते मुनस्यारी से एक पुराना ठेकेदार आया था, बोल रहा था 'देखो भाई, खेलों में तो करोड़ों लगेंगे, हमारे यहाँ पक्की सड़क तक नहीं आई।' मैंने कहा, ठीक है भाई, लेकिन जब तक हम अपने घर की फ़ैन की मोटर खुद नहीं रिवाइंड कर लेंगे, तब तक कोई आकर हमारी तार नहीं जोड़ेगा। ये खेल तो अच्छे हैं, पर पहाड़ की ज़िंदगी सिखाती है कि जो सड़क कच्ची है, उसी पर एनफील्ड चलती है, भले
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