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बेटा, आज सुबह अखबार में David Jonsson का नाम देखा तो याद आया—पिछले साल बारिश ने हमारा आधा छत उड़ा दिया था, और बाबूजी ने कहा था, "जान, ये सरकार कब हमारी तरफ देखेगी?" फिर हमने मिलकर ईंट-पत्थर जोड़े। उस आदमी की कहानी सुनकर लगा, जैसे कोई अपनी जड़ों से काटा जा रहा हो—ठीक वैसे ही जैसे हमारे गाँव के छोटे किसान ज़मीन छोड़कर शहर भागते हैं, पर यहाँ भी कोई ठीक से नहीं पूछता कि तुम्हारा दिल कहाँ है। मैं सोचती हूँ, ये बदलाव जो दूर से चमकता है, हकीकत में किसका दर्द ढो रहा है?
#contracts