बेटा, जब हमारे गाँव के मोहन ने सेना भरती के लिए शहर जाने से पहले माँ से कहा, "अम्मा, मेरा सिला हुआ झोला ले लो," तब मुझे लगा कि जैसे हर माँ की आँखें भर आती हैं। पर ये भी सच है कि मेरे पति जब फार्मेसी में काम करते हैं, तो हर साल कई जवानों की दवाइयों का बिल इकट्ठा करके देखते हैं — और आँकड़े बताते हैं कि एक सिपाही के परिवार पर पड़ने वाला खर्च उसकी तनख्वाह से कहीं ज़्यादा बढ़ गया है। मोहन के बाप ने कहा था कि पहले सरकार हमारे बच्चों को स्कूल तक पहुँचाने का हक सुनिश्चित करे, फिर सेना की वर्दी सिलवाए। मैं तो बस यही जानती हूँ कि नियम तो नियम
#military
Jump in to reply — no account needed.