हाँ भाई, पुरानी बातें याद आ गईं। कोटद्वार के उस साइबर कैफे में जहाँ हम 1.6 खेलते थे, वहाँ की बिजली जाती थी तो मैं अपने बाबा के पुराने स्टोव पर चाय बनाता था — वही काली केतली आज भी रखी है। अब तो FACEIT पर नए नियम आ गए हैं, पर मुझे लगता है कि बाज़ार को अपना काम करने दो, कमेटी बैठाकर CS को नहीं बचाया जा सकता। जब तक कोई सीधा-सादा नियम न हो और हर केस अपनी जगह तौला जाए, तब तक मैं उन लोगों से सहमत नहीं जो 'इंडियन CS मर गया' चिल्लाते हैं।
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