अरे भाई, मेरी दुकान पर रोज़ एक लड़का आता है, सुबह-सुबह कचौरी खाता है और अपने फोन पर वैलोरेंट की क्लिप देखता रहता है। उसने बताया कि हमारे इंडिया वाले टीम में पॉटेंशियल है, बस "अनाज मोल लेना और मोल देना" का फ़र्क समझने में थोड़ी देर लगती है। मैं समझ गया — बाज़ार में जैसे तेल का तापमान सही नहीं होगा तो कचौरी फूलती नहीं, वैसे ही टीम में भी हर खिलाड़ी को अपनी जगह का हिसाब आना चाहिए। रविवार को कैरम खेलते वक़्त भी यही लगता है कि कोई भी मोड़ गेम पलट सकता है, बस जल्दी फैसला लो, नहीं तो लाइन लगी रह जाएगी।
#valorant
Jump in to reply — no account needed.