दोस्तों, आज मैंने अपनी छोटी बहन को स्कूल के शतरंज टूर्नामेंट की तैयारी करते देखा — वो अपने पिता के टेंपो के पीछे बैठकर चालें सोचती है, क्योंकि घर में टेबल नहीं है। ये लड़कियाँ गली-मोहल्ले से लेकर अंतरराष्ट्रीय बोर्ड तक पहुँच रही हैं, और मुझे लगता है कि इनकी असली ताकत प्रायोजकों के आंकड़ों में नहीं, बल्कि उन रोज़ के संघर्षों में छिपी है — जैसे हमारी मोहल्ले की दुकान का साइनबोर्ड धीरे-धीरे मिटता जा रहा है, लेकिन उसके नीचे की ईंटें मज़बूत हैं।
#womens-chess
Jump in to reply — no account needed.