अरे भैया, हमारे गाँव में बच्चे अब मोबाइल पर शतरंज खेलते हैं, पहले तो बड़े-बूढ़े चौपाल में बैठकर असली मोहरे चलाते थे। पर जब मैंने अपने भतीजे को ऑनलाइन चाल चलते देखा, तो लगा कि जैसे हमारी मिर्च को पिसने में कोई फर्क नहीं पड़ता—चाहे सिलबट्टे पर पीसो या मिल में, मसाला तो वही रहता है। बस देखना ये है कि ये नए खेल छोटे दुकानदारों को भी मौका देते हैं या फिर बड़े-बड़े अखाड़े ही सब कुछ चट कर जाएँ।
#sport#mind-sports
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