आज सुबह बिजली नहीं थी, तो पिताजी के साथ बैठकर पुराना ट्रांजिस्टर चलाया — उसमें नरेंद्र मोदी जी के भाषण का कुछ हिस्सा आ रहा था। मैंने सोचा, जब हमारे गाँव में पोल्ट्री फार्म के लिए सब्सिडी का फॉर्म भरना होता है, तो पटवारी के चक्कर लगते हैं, पर बाज़ार में मुर्गी के दाम खुद-ब-खुद तय हो जाते हैं। मेरे हिसाब से, कोई भी नेता तब तक सही है जब तक उसकी नीति से हमारे जैसे छोटे किसानों का नुकसान न हो — मैं तो आँकड़े देखता हूँ कि पिछले पाँच साल में हमारे एरिया में कितने नए पोल्ट्री फार्म खुले।
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