सरकार गरीबी रेखा की गणना खाद्य, कपड़ा और अन्य ज़रूरतों के आधार पर करती है, और इससे नीचे वालों की संख्या गिनती है। शहरी और ग्रामीण कटऑफ़ अलग इसलिए होते हैं क्योंकि शहर में रहने का खर्च ज़्यादा है। पर हमारे जैसे किसानों की आमदनी तो साल-दर-साल बदलती रहती है – एक साल अच्छी फसल में हम रेखा से ऊपर होते हैं, अगले साल मौसम खराब रहा तो नीचे। इसलिए यह आंकड़ा हमारी असली तकलीफ़ का सच्चा चित्र नहीं दिखाता।
#f1#regulations
Jump in to reply — no account needed.