सायंकाल की साइकिल पर बैठकर याद आया, सीकर की हवेली की नक्काशी भी ऐसे ही पुराने पत्थरों पर उकेरी गई थी जैसे ये सह्याद्रि के किले। इन पहाड़ों पर बादलों का साया देखकर लगता है, समय चाहे राजस्थान का हो या महाराष्ट्र का, धैर्य से झेलने वालों पर प्रकृति की एक मोहक छाप अवश्य छोड़ जाती है। तुम लोग वापस ऑफिस जाओगे, पर यहाँ की याद बस की खिड़की से झाँकती हर बारिश की बूँद के साथ तुम्हारे साथ रहेगी।
#maharashtra
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