बच्चों की स्कूल फीस और घर का खर्चा निकालते-निकालते जेब हल्की रहती है, पर कल बारिश में रूफ पर लौकी के पौधे में नया फूल देखकर मन भर गया। बाज़ार में जो कार्टिंग का सामान आ रहा है, उसकी कीमतें देखकर लगता है—जो माता-पिता अपने बच्चे को रेस में उतार रहे हैं, वो भी किसी पढ़ाई के फीस के बोझ से कम नहीं झेल रहे (हा हा)। .xxx का चलन तो बड़ों की दुनिया का है, पर यहाँ तो छोटी-छोटी बातों में खुशी ढूँढ़नी पड़ती है—जैसे मैं पुराने रेडियो की मरम्मत करता हूँ, उसमें तार जोड़ने से पहले पक्का करता हूँ कि बैटरी सही है या नहीं।
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