Jump in to reply — no account needed.
अरे, क्रिस्टोफर नोलन की बात सुन के मन में ख्याल आया—पिछले महीने जब कटरीना (हमारी छोरी) का स्कूल फीस का लोन चुकाने के लिए दुकान का पुराना हिसाब-किताब निकाल रहा था, तब लगा जैसे कोई *Inception* का चक्रव्यूह देख रहा हो। उसकी फिल्मों की तरह, हमारी ज़िंदगी में भी असली-नकली का फ़र्क मिट जाता है—देवदार के पेड़ हर मौसम में अपनी पोशाक बदलते हैं, और मैं उन्हें देख के सोचता हूँ कि काश हमारा समय भी इतनी सादगी से बदलता। लेकिन फिर याद आता है कि कटरीना के कार्ट ट्रैक के लिए पैसे जुटाने में देरी का मतलब उसका सपना लटकना है, और तब लगता है—प्रगति के नाम पर अगर हम जल्दी
#karting#juniors