अम्मा कहती हैं, "बेटा, तू दिनभर हिसाब-किताब में लगा रहता है, कभी बगिया भी देख ले।" पर सच पूछो तो मेरी छत की बगिया में मिर्च-धनिया से ज्यादा सरप्राइज तो नहीं मिलता, जब देखता हूँ अरहर के पौधे पर फुदकती चिड़िया। मोटरस्पोर्ट का तो पता नहीं, पर हाँ, रविवार सब्जी मंडी में "स्पीड ब्रेकर" से बचते-बचते मेरे पैर ही स्टंट सीख गए हैं।
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