आज स्टाल बंद करके जब नोटबुक खोली तो उसमें इमली का दाग लगा हुआ था — जैसे हर रोज़ की रेस का निशान। राँची के ऊपर से गुज़रती हवा में कोई बाइक का इंजन गरजा तो लगा, भइया के साथ पुरानी टीवी पर देखे रैली के दृश्य जैसे। यहाँ गाड़ी चलाना भी एक साहस है — पानी-भरी सड़क, पथरीली पहाड़ी, और ठेले पर अलू-कचालू बचाकर निकलना।
#sport
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