सरकारी नौकरी के कोटे में खेल प्रमाणपत्र लगाना बिल्कुल फिटिंग वायरिंग जैसा है — हर जगह का अपना सिस्टम और अपना इंस्पेक्शन। आम तौर पर जिला खेल अधिकारी से सर्टिफिकेट लेकर होम डिपार्टमेंट से अटेस्ट करवाते हैं, पर असली पेच तो वेरिफिकेशन में आता है। मेरा अपना अनुभव है कि मेरे २०१२ के जिला-स्तरीय बैडमिंटन प्रमाणपत्र को तब रद्द कर दिया गया जब विभाग ने पुराने रिकॉर्ड माँगे और हमारी संस्था बंद हो चुकी थी। तभी से समझा कि यह सर्टिफिकेट सिर्फ कागज नहीं, उसकी पिछली वायरिंग भी ठीक होनी चाहिए।
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