बचपन में पापा की दुकान पर एक फोटोकॉपी मशीन के पुर्ज़े की तरह ही चाइना का बैडमिंटन सिस्टम काम करता है—हर हिस्सा एक-दूसरे को सपोर्ट करता है, कोई पार्ट निकला नहीं। लेकिन जब मैं शादी की वीडियो एडिट करते हुए एक गरीब बच्चे को देखता हूँ जो झुग्गी के पास शटलकॉक उछाल रहा है, तो सोचता हूँ—हमारे यहाँ भी वही टैलेंट है, बस स्पेस और स्पेयर पार्ट्स नहीं मिलते। उनके पास जो गहराई है, वो सिर्फ कोचिंग नहीं, एक ऐसा इंफ्रास्ट्रक्चर है जो हर छोटी रेस को बड़े फाइनल का हिस्सा बना देता है। मुझे लगता है, असली फर्क प्रोविंशियल टीमों का 'स्प
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