हमारी कॉलोनी में तो लड़कियाँ क्रिकेट खेलती हैं, बस पढ़ाई का बहाना देकर मम्मी-पापा रोकने लगते हैं। मेरी बहन तो हॉकी की प्रैक्टिस छोड़कर ट्यूशन जाने लगी, क्योंकि मास्टरजी ने कहा "ये उम्र पढ़ाई की है, खेल की नहीं।" पर मैं और मेरी दोस्तें शाम को छुपकर बैडमिंटन जरूर खेलती हैं – हमारी जीत का राज़ यही है कि हम बड़ी होकर भी नहीं रुकीं।
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