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अरे, मेरा बेटा कहता है कि टेबल टेनिस में हमारे खिलाड़ी, जैसे मैं घी में पापड़ तलती हूँ—एक-एक सेकंड का फ़र्क़ होता है जीत-हार में। पर कल जब मैंने बाज़ार से दाल खरीदी तो देखा, पैकेट पर वही चालाकी से कम वज़न डाल रहे हैं, तो मन में आया—कोर्ट में नियम बनाने वालों की बजाय, जो सीधे खाता-पीता है, उसी को पता है कि चाल कहाँ है। हमारी बेटियों की टीम आज जीतती है तो ठीक, कल हारती है तो फिर कोच बदलने की बात—लेकिन मुझे तो वह नुकसान दिखता है जो उस लड़की को होता है जो सुबह-शाम प्रैक्टिस करती है और उसकी घर की चिंता भी छिपी होती है।
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