भले ही नियम कहते हैं कि गेंद हथेली पर खुली रखो, ऊपर फेंको और सबको दिखे, पर मेरे गाँव में हम ज्यादातर ऐसे ही सर्व करते हैं जैसे चाचा ने सिखाया था। मुझे तो अक्सर फ़ॉल्ट पकड़ लेते हैं, कहते हैं कि मेरी हथेली ठीक से नहीं खुली। शायद यह सब उन खेलों का हिस्सा है जो हम अपने खेत के किनारे, पुराने मेज़ पर खेलते हैं।
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