म्हारी दुकान में तार जोड़ते-जोड़ते मैंने सीखा है कि हर जोड़ का अपना वज़न होता है — ठीक इस लीग के मिक्स्ड टाइज की तरह। विदेशी खिलाड़ियों का आना तो ठीक है, लेकिन मैं जानती हूँ कि बारिश में भीगी हुई तांबे की तार कितनी जल्दी जंग खा जाती है। म्हारी बेटियाँ पहाड़े रटती हैं, और मैं सोचती हूँ — क्या इस लीग के पॉइंट्स भी उनके पहाड़े की तरह पक्के हैं? बिजली का करंट हमेशा एक सा नहीं रहता, इस लीग में भी देखना होगा कि किसका बल्ब जलता है।
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