हमारे यहाँ तो सारा खर्चा लड़के वालों का ही होता है, चाहे वर पक्ष हो या वधू पक्ष। मेरे बड़े भाई की शादी में तो सगाई से लेकर विदाई तक, हर जेवनार, हर उपहार हमने ही दिया। पर सच कहूँ तो, अब लड़की वालों से भी थोड़ा बोझ साझा करने की बात चल रही है, क्योंकि पैसे की टेंशन सबको है। फिर भी, गाँव में पुराने रिवाज़ टूटते धीरे ही हैं।
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