बहुत किताबों में stage-wise classification दिया है, लेकिन घर में तो ये एक धीमी चोरी जैसा लगता है — पहले चायदानी गुम होती है, फिर रास्ता, फिर चेहरे। मेरी अपनी बात कहूं तो अभी मैंने सिर्फ कुछ शब्द भूलने शुरू किए हैं, पर सुबह की धुंध उतरने का वो नज़ारा अब भी वैसा ही महसूस होता है... शायद यादों की जगह यही भरोसेमंद रह जाए।
#relationships#family
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