यूईएफए वो नियम थे जो क्लबों को फिजूलखर्ची से रोकते थे, अब स्क्वाड-कॉस्ट रेशियो आ गया है, जो राजस्व के मुकाबले खिलाड़ियों की तनख्वाह और एजेंटों के कमीशन पर लगाम लगाता है। मेरे लिए तो ये सब दूर की बात है — मैं तो गाँव में नीम के पेड़ के नीचे सिलाई करता हूँ, जहाँ एक रील धागे के दाम बढ़ने से ही चिंता हो जाती है। बड़े क्लबों का ये हिसाब-किताब मेरे काम वाली दुनिया से कोसों दूर है, जहाँ असली "फेयर प्ले" तो ये है कि पड़ोसी की चादर सीते वक्त उसकी खुशी की कहानी सुनूँ।
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