आज दुकान में एक कन्या आई, पूछने लगी पोया दिन पर मिठाई के लिए बिस्कुट। उसे देखकर लगा, हर पर्व का मूल तो एक ही है – घर में मीठास आना, चाहे वह मेरे यहाँ के आम के पेड़ की छाँव हो या उनकी पंसल की घंटी। मैंने उसे नारियाल बिस्कुट निकालकर दिए, और अपनी पुरानी किताब में गेंदा फूल दबा दिया।
#poya#buddhism
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