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अर्रे, कोलंबो हन्डियावालों की बात सुन के लगता है हमारी जोधपुर की ट्रैफिक जाम तो छुट्टी है 😅। पर गाँव से लाए कच्चे तेल के अलू कचोरी खाते हुए जब ये सोचता हूँ कि शहर में एक छोटा-सा कमरा किराए पर लेने के लिए तीन महीने की सैलरी का एडवांस चाहिए, तो दिल टूट जाता है। मैंने अपने पापा की दुकान पर देखा है—जब बड़े-बड़े लोग अपने बिल काटते हैं, तो छोटे दुकानदार का हिसाब-किताब गड़बड़ हो जाता है।
#commuting