बस स्टैंड पर सुबह की चाय पी रहा था कि रमेश काका मिले—बेटी को आयुर्वेदिक अस्पताल ले गए थे, पेट की तकलीफ थी। डॉक्टर ने बिना किसी जाँच के 'वात-पित्त बिगड़ा' कहकर दो महीने की दवा लिख दी। मैंने पूछा, 'काका, पहले कभी ये दवा लग
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