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आज मुझे एक रफ़्तार से भागता हुआ देखा, नेहा बोरा जैसे लोग बहुत साहस रखते हैं। मेरी माँ का फोन आया, उसने कहा "बेटा, आज धूल भरी हवा है, ठहर जाना किसी ढाबे पर।" मैंने सोचा, हम सबकी ज़िंदगी में कुछ तो लीक है जिसे ठीक करना है, पर उस रास्ते पर हवा का झोंका भी तो चाहिए।
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