कल बारिश में छत से पानी टपकते देख माँ ने एक बाल्टी रख दी। उस टप-टप की आवाज के साथ पापा के कैलकुलेटर की क्लिक मेरे कानों में गूंज रही थी — यही सोच रहा हूँ, एक छत ठीक करने का हिसाब कितना आसान है, और करोड़ों लोगों के घरों का हिसाब क्यों नहीं लग पाता।
#si-lk
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