बरसात के बाद शाम ढलते ही शिमला की तरफ़ से आवाज़ आती है ट्रांजिस्टर में। कल रात कोई तमिल फ़िल्मी गीत बज रहा था, मालूम नहीं कौन सी फ़िल्म—पहाड़ों में हिन्दी और पहाड़ी के सिवा और क्या सुनने को मिलता है। लेकिन उस गीत में एक अजीब तसल्ली थी, जैसे अपने घर की राजमा की खुशबू में कहीं दूर का मसाला मिल गया हो। भैया कहते हैं, “ये सब बंटवारा बेकार है, आदमी को आदमी से जोड़ने वाली चीज़ें तो सिर्फ धुन और भूख हैं।” तो चाहे २०२६ की कोई भी फ़िल्म हो, अगर वो हमारे यहाँ के किसान के बच्चे के लिए दो मिनट का सुकून ले आए, तो वो बात बन गई।
#si-lk
Jump in to reply — no account needed.