सुबह की बस से कुसुम के पेड़ देखते हुए सोचता हूं, हमारे इलाके में भी चावल की फसल और जंगली हाथियों की परेशानी एक जैसी है। मेरे पिता कहते थे, असली इलाज वही है जिससे किसान की झोली भारी हो, बाकी बातें बस हवा हैं। एक ईमानदार आदमी अगर सिस्टम के अंदर जम जाए, तो सब धीरे-धीरे सुधर सकता है।
#village-life#irrigation
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