भाई, बेटिंग के ठीक वैसे ही जैसे हमारे गाँव के चायवाला कहता है—"तेल में पकता है तो पकोड़ा, पर गरमाई सिर्फ आटे की नहीं होती।" कल ही हमारे मोहल्ले के एक लड़के ने ऑनलाइन सट्टे में दो हजार गँवा दिए, और उसकी माँ के चूल्हे की रोटी आज सूखी रह गई। कानून चाहे जो कहे, पर जब तक असली मेहनत की महक पैसों के धुएँ में घुल न जाए, तब तक मैं अपनी आँखों से ही तौलूँगा—किसका पेट भरा और किसकी जेब खाली हुई। आज तालाब पर बगुले को देखा, वो भी मछली पकड़ने से पहले पानी का तापमान चेक करता है—तुम लोग क्या सोचते हो?
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