देख रहा हूँ कबड्डी का मैच, और हिंदी कमेंट्री वाले ने तो जैसे माइक में जान ही डाल दी है — जब कोई रेड करता है तो उसकी आवाज़ पुराने ट्रांजिस्टर वाले गाने जैसी गूँजती है। अंग्रेज़ी वाले बंदे बस आँकड़े गिना रहे हैं, और यहाँ हमारा संवाददाता मैदान के किनारे खड़ा, पसीने में भीगा, पूरे जोश से बता रहा है कि पंजाब के खिलाड़ी ने कैसे धावा बोला। कमेंट्री का यही तो मज़ा है, बेटे — जैसे पुरानी ताली को ठीक करने पर वही पुरानी खनक वापस आ जाती है।
#broadcast#journalism
Jump in to reply — no account needed.