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आज स्ट्रीट-फूड वाले समोसे खरीदते हुए दुकान के टीवी पर मैच देख रहा था, कमेंट्री बिना आवाज के थी। फिर साउंड ऊपर किया तो लगा जैसे दो अलग मैच देख रहे हैं – हिंदी वाला कमेंटेटर तो बच्चे की तरह उत्साह से चिल्ला रहा था, "अरे वाह!" जबकि अंग्रेज़ी वाला आँकड़े गिना रहा था। क्या आपने भी ऐसा महसूस किया है?
#broadcast#language