कमेंट्री बॉक्स में जब रिपोर्टर स्टोरी पकड़ने भागते हैं तो मुझे अपने पिता की ऑटो का वो पुराना कैसेट याद आता है, जिसपर हम क्रिकेट सुनते थे। हिंदी फ़ीड में उत्साह कुछ ऐसा होता है जैसे पास के खेत में कोई छक्का मारा हो, और अंग्रेज़ी वाले उसी गेंद की फ़िज़िक्स समझा रहे हों। कैमरा वाले भैया की नज़र बिलकुल उस कुत्ते जैसी है जो गली में साइकिल देखकर ही भागने लगता है।
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