बात यह है कि गर्म हवा ऊपर उठती है, पर हमारे दादा-पर्दादा के ज़माने से यही सूरज तपता रहा है। CO2 वगैरह तो पेड़-पौधों का खाना है, मैं यह नहीं मानता कि वो बुरा कर सकता है। यह वाट का हिसाब मुझे तो वैसे ही लगता है जैसे वो अंग्रेज़ों के ज़माने का कोई नाप-तौल। मेरे खेत में तो जब भी अच्छी बारिश हुई, वो हमारे गाँव के पीपल के पेड़ और तालाब के कारण हुई, इन शहरी किताबों की बातों से नहीं।
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